लोकाचार किसे कहते हैं? लोकाचार परिभाषा (रूढ़ियाँ)  Mores

लोकाचार का अर्थ :-

लोकाचार का अंग्रेजी शब्द ‘mores’ लैटिन शब्द ‘mor’ का बहुवचन है, जिसका अर्थ है प्रथा। इस शब्द का उपयोग समूह द्वारा आवश्यक पारंपरिक व्यवहारों का वर्णन करने के लिए किया गया है। समाजशास्त्र में mores शब्द का प्रयोग करने का श्रेय अमेरिकी समाजशास्त्री समनर को जाता है। mores शब्द का हिन्दी रूप लोकाचार और रूढ़ि दोनों है।

रूढ़ि शब्द का उपयोग आमतौर पर अप्रचलित, पिछड़े और बिगड़ा हुआ प्रथागत व्यवहारों के लिए किया जाता है, जबकि लोकाचार उन व्यवहारों के लिए करते हैं जिनमें समूह की भलाई की भावना होती है। इसलिए, हम Mores के लिए रूढ़ि शब्द के स्थान पर लोकाचार शब्द का उपयोग करेंगे।

लोकाचार की व्याख्या करते हुए समनर लिखते हैं, “लोकाचार से मेरा तात्पर्य उन लोकप्रिय रीति-रिवाजों और परंपराओं से है, जिनमें जन-जन की यह भावना निहित है कि वे सामाजिक कल्याण में सहायक हैं और वे व्यक्ति पर उनके अनुरूप व्यवहार करने का दबाव डालते हैं, यद्यपि कोई सत्ता उसे ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं करती हो।”

लोकाचार मानव व्यवहार के वे प्रतिमान हैं जिन्हें समूह लाभकारी मानता है और उनका उल्लंघन करना समाज का अपमान माना जाता है। वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होते रहते हैं जिसे बिना किसी विचार या तर्क के स्वीकार कर लिया जाता है।

इस प्रकार लोकाचार वह सामाजिक व्यवहार है जो समूह द्वारा अपेक्षित होता है और नैतिकता की भावना पर आधारित होता है। लोकाचार में समूह कल्याण की भावना निहित है। इसलिए, उन्हें अधिक दृढ़ता से अनुमोदित किया जाता है।

लोकाचार की परिभाषा :-

लोकाचार को और भी स्पष्ट करने के लिए कुछ प्रमुख विद्वानों की परिभाषाओं का उल्लेख कर सकते हैं –

“जब जनरीतियों में औचित्य पूर्ण जीवन यापन का दर्शन और कल्याणकारी जीवन की नीति का समावेश हो जाती है, तो वे लोकाचार बन जाते हैं।”

समनर

“जब लोकरीतियाँ अपने साथ समूह के कल्याण की भावना और उचित अनुचित का विचार जोड़ लेती है, तो यह लोकाचार में बदल जाती है।”

मैकाइवर एवं पेज

“कार्य करने के वे सामान्य तरीके जो जनरीतियों की अपेक्षा अधिक निश्चित एवं उचित माने जाते हैं तथा जिनके उल्लंघन पर गम्भीर एवं निश्चित दण्ड दिये जाते हैं, लोकाचार कहलाते हैं।”

ग्रीन

“लोकाचार वे लोकरीतियाँ हैं जो किसी समूह के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विशेषकर उस समूह के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण समझी जाती हैं।”

सदरलैण्ड एवं अन्य

“उचित रूप में लोकाचार समूह की वे अपेक्षाएं हैं जिन्हें समूह के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।”

मैरिल तथा एलरिज

“लोकाचार वे लोकरीतियाँ हैं जिन्होंने अपने साथ यह निर्णय का समावेश कर लिया है कि उन पर समूह का कल्याण मुख्य रूप से निर्भर करता है।”

डासन और गेटिस

“लोकाचार वे प्रथाएं और समूह दिनचर्या हैं जिन्हें समाज के सदस्यों द्वारा समूह के सतत अवस्थिति के लिए आवश्यक समझा जाता है।”

गिलिन एवं गिलिन

“जनरीतियाँ उसी समय लोकाचार बन जाते हैं जब उसके साथ कल्याण का तत्व जोड़ दिया जाता है।”

लुम्ले

लोकाचार की विशेषताएं :-

लोकाचार को अधिक स्पष्ट रूप से समझने के लिए हम यहां उनकी विशेषताओं का उल्लेख करेंगे –

बाध्यता का गुण –

समूह के प्रत्येक व्यक्ति के लिए लोकाचार का पालन करना आवश्यक हो जाता है। सामाजिक बहिष्कार और दण्ड के भय से भी व्यक्ति इन लोकाचारों का पालन करने को बाध्य होता है।

समूह द्वारा अपेक्षित व्यवहार –

लोकाचार समूह द्वारा अपेक्षित व्यवहार है। प्रत्येक समूह या समाज अपने सदस्यों से एक निश्चित तरीके से व्यवहार करने की अपेक्षा करता है क्योंकि वे व्यवहार पारंपरिक होते हैं, उनके साथ पिछले अनुभव जुड़े होते हैं और समूह कल्याण के लिए आवश्यक समझे जाते हैं।

स्वतः विकास –

लोकाचार स्वचालित रूप से विकसित होते हैं, कानून के विपरीत, वे किसी विशेष संगठन द्वारा जानबूझकर नहीं बनाए जाते हैं। वे तर्क या भविष्य की कल्पना पर आधारित नहीं हैं। इनके विकास में संयोग एवं आकस्मिकता का बड़ा हाथ है।

स्वाभाविक प्राकृतिक –

चूंकि लोकाचार समाज में लंबे समय से स्थापित हैं, इसलिए वे स्वाभाविक हैं। व्यक्ति समाजीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से अपने समाज के लोकाचार को स्वचालित रूप से सीखता है और आत्मसात करता है।

रूढ़िवादी प्रवृत्ति –

लोकाचार रूढ़िवादी प्रवृत्ति के होते है। चूँकि इनके निर्माण में समूह का अनुभव शामिल होता है, इसलिए समूह के लोग अपने लोकाचार को बदलने में अनिच्छा व्यक्त करते हैं। लोग यथास्थिति बनाए रखना चाहते हैं और वैधानिक प्रयास भी उन्हें बदलने में विफल रहते हैं।

समूह कल्याण की भावना –

लोकाचार में समूह कल्याण की भावना निहित है। लोकाचार में व्यक्ति के उन व्यवहारों को समूह या समाज द्वारा मान्यता दी जाती है, जो संपूर्ण समूह के कल्याण के लिए आवश्यक होते हैं।

नैतिकता का समावेश –

लोकाचार में बहुत अधिक नैतिकता है इसलिए इनका पालन धार्मिक कर्तव्य के रूप में किया जाता है। लोकाचार का उल्लंघन भी अनैतिक माना जाता है। गरीबों की मदद करना, मेहमानों का स्वागत करना, माता-पिता की आज्ञा का पालन करना और उनकी सेवा करना ये सभी लोकाचार हैं जिनका हम नैतिकता के कारण पालन करते हैं।

सामाजिक नियंत्रण –

लोकाचार सामाजिक नियंत्रण का एक शक्तिशाली साधन है। इनके पीछे जनमत का दबाव है. लोकाचार का उल्लंघन करने का साहस कोई नहीं कर सकता। जो लोग उनकी आलोचना करते हैं उन्हें समाज द्वारा कड़ी सजा दी जाती है।

लोकाचार अनौपचारिक सामाजिक प्रतिमान है –

लोकाचार का निर्माण और बनाए रखने के लिए कोई विशिष्ट औपचारिक संगठन नहीं है। लोग इनका पालन करना अपनी उत्तरदायित्व समझते हैं।

लोकाचार के प्रकार :-

लोकाचारों का वर्गीकरण है –

  • सकारात्मक लोकाचार
  • नकारात्मक लोकाचार

सकारात्मक लोकाचार यह तय करता है कि हमें समाज में किस तरह का व्यवहार करना चाहिए, जैसे माता-पिता और बड़ों का सम्मान करना चाहिए, हमेशा सच बोलना चाहिए, ईमानदार रहना चाहिए आदि।

नकारात्मक लोकाचार यह तय करता है कि हमें समाज में किस तरह का व्यवहार नहीं करना चाहिए, जैसे चोरी नहीं करनी चाहिए, झूठ नहीं बोलना चाहिए आदि।

संक्षिप्त विवरण :-

जनरीतियाँ ही आगे चलकर लोकाचार में बदल जाती हैं। जब कोई जनरीतियाँ समाज में लंबे समय से प्रचलित हो, जो समूह के लिए आवश्यक मानी जाती हो और जो समूह के हित में हो, तो वह लोकाचार का रूप ले लेती है।

FAQ

लोकाचार क्या है?

लोकाचार की विशेषताएं बताइए?

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