संवेदी स्मृति क्या है संवेदी स्मृति के प्रकार sensory memory

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  • Post last modified:मार्च 11, 2024

संवेदी स्मृति :-

संवेदी स्मृति को स्मृति की प्रारंभिक अवस्था या उत्तेजना, सूचना या सीखने से उत्पन्न प्रभाव भी कहा जाता है। यह स्मृति संवेदी सांवेदिक निवेश पर निर्भर करती है। इसकी अवधि एक सेकंड से भी कम मानी जाती है।

इस मेमोरी के लिए संवेदी पंजिका सम्प्रत्यय का भी उपयोग किया जाता है। स्मृति की इस अवस्था में स्मृति में कोई परिवर्तन या प्रक्रमण नहीं होता है। यही कारण है कि यह स्मृति क्षणभंगुर है।

इस प्रकार, यह स्पष्ट हो रहा है कि संवेदी स्मृति वह स्मृति है जो लगभग एक सेकंड के भीतर जाँचने पर प्राप्त होती है। संवेदी स्मृति वह स्मृति है जो अधिगम की सामग्री या उद्दीपक को सामने से हटाने के बाद भी कुछ क्षणों तक बनी रहती है।

इसी प्रकार इसे क्षणिक प्रतिमा भी कहा जाता है। यहीं से स्मृति प्रक्रिया शुरू होती है। इसे मानसिक चित्र भी कहा जाता है। संवेदी स्मृति प्रणाली इस प्रतिमा को ज्यों का त्यों रखने का प्रयास करती है।

संवेदी स्मृति की परिभाषा :-

संवेदी स्मृति को और भी स्पष्ट करने के लिए कुछ प्रमुख विद्वानों की परिभाषाओं का उल्लेख कर सकते हैं –

“स्मृति भंडारण की एक प्रणाली है जिसमें सामग्री लगभग एक सेकंड के लिए अपने मूल, अप्रकमित, संवेदी रूप में रहती है।”

ग्लीटमैन

”उद्दीपक हटा लेने के बाद भी संवेदी सूचना का कुछ क्षण तक विलंबित रहना संवेदी स्मृति है।“

प्राइस इत्यादि

संवेदी स्मृति की विशेषताएं :-

संवेदी स्मृति में पाई जाने वाली मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • संवेदी स्मृति अत्यंत क्षणिक होती है।
  • अभ्यास का संवेदी स्मृति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  • इसकी भंडारण क्षमता अधिक है लेकिन अवधि बहुत कम है (जैसे 1 सेकंड)।
  • संवेदी स्मृति की अवस्था में सूचना को प्रक्रमण नहीं किया जा सकता है, जैसे कूट संकेत या नामकरण प्रक्रियाएँ आदि इसमें अंतर्निहित नहीं होती हैं।
  • संवेदी स्मृति में सूचना अपने मूल रूप में रहती है। इसके विपरीत, अन्य स्मृतियों (जैसे एसटीएम, एलटीएम) भी अपना रूप बदलती हैं, जैसे ‘बीटीयू’ को ‘टीयूबी’ या ‘बीयूटी’ के रूप में कूटसंकेतित करना और दोहराते समय मूल रूप में बोलना। लेकिन संवेदी स्मृति में ऐसा नहीं हो पाता है।

संवेदी स्मृति के प्रकार :-

संवेदी स्मृति दो प्रकार की होती है :-

प्रतिमात्मक स्मृति –

”प्रतिमात्मक स्मृति ऐसा चाक्षुष स्मृति चिन्ह या उद्दीपक का सतत पश्चात प्रभाव है जिसकी संचयन क्षमता अपेक्षाकृत व्यापक है लेकिन एक सेकंड से अधिक नहीं होती है।”

प्राइस इत्यादि

प्रयोज्य या व्यक्ति के सामने से किसी उद्दीपक या सीखने की सामग्री को हटाने के बाद भी जो क्षणिक प्रतिमा रेटिना पर बनती है, उसे प्रतिमात्मक या चाक्षुष स्मृति कहा जाता है। इसमें उद्दीपक या सामग्रियों को बहुत ही कम समय के लिए प्रदर्शित किया जाता है।

अर्थात् प्रतिमात्मक स्मृति क्षणिक होती है। वस्तु या उद्दीपक प्रदर्शन के बाद विलम्ब बढ़ने के साथ स्मृति की हास भी बढ़ जाती है, हालांकि इसकी अवधि प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति से अधिक लंबी होती है।

यह स्मृति अत्यंत क्षणभंगुर है। इसका कारण संभवतः यह है कि प्रयोज्य प्रदर्शित सामग्री को निर्धारित समय में ठीक से प्रदर्शित नहीं कर पाते हैं और न ही स्मृति चिह्नों को क्षणिक समय में प्रक्रमण किया जाता है (जैसे कूट संकेतन, नामकरण, संचयन, आदि)। इससे वे कमजोर हो जाते हैं और भूलने की गति बढ़ जाती है।

प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति –

“प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति श्रवणात्मक स्मृति चिन्ह या उद्दीपक का सतत पश्चात प्रभाव है, चाक्षुष या प्रतिमात्मक स्मृति की भाँति इसकी भी अवधि अत्यन्त लघु होती है। “

प्राइस इत्यादि

प्रतिमात्मक स्मृति के अलावा, शोधकर्ता प्रतिध्वन्यात्मक या श्रवणात्मक संवेदी स्मृति के अस्तित्व को साबित करने में सफल रहे हैं। यू.नीसर ने कहा है कि इसकी विशेषताएं प्रतिमात्मक स्मृति के समान हैं।

अंतर यह है कि प्रतिमात्मक स्मृति दृश्य उद्दीपकों की दशा में प्राप्त की जाती है और प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति तब प्राप्त की जाती है जब श्रवणात्मक उद्दीपकों का प्रयुक्त किया जाता है। इससे पता चलता है कि प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति भी बहुत क्षणभंगुर होती है।

प्रतिमात्मक स्मृति और प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति में अंतर :-

इन स्मृतियों के बीच प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं:-

  • प्रतिमात्मक स्मृति की अवधि लंबी होती है। जबकि प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति की अवधि कम है।
  • प्रतिमात्मक स्मृति दृष्टि उद्दीपकों के लिए पाई जाती है। जबकि प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति ध्वनि उद्दीपकों के लिए पाई जाती है।
  • प्रतिमात्मक स्मृति में प्रक्रमण प्राय संभव नहीं हो पाती, जबकि प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति में प्रक्रमण का कुछ फायदा भी होता है।
  • प्रतिमात्मक स्मृति में रेटिना की भूमिका होती है। जबकि प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति में कॉर्टेक्स के अंगों की भूमिका होती है।
  • प्रतिमात्मक स्मृति के बारे में प्राप्त निष्कर्षों में समानता है। जबकि प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति के बारे में प्राप्त निष्कर्ष विवादास्पद हैं।

FAQ

प्रतिमात्मक स्मृति क्या है?

प्रतिध्वन्यात्मक स्मृति क्या है?

संवेदी स्मृति के प्रकार बताइए?

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