भारत में श्रम समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण
श्रम समस्याओं के बढ़ने का मुख्य कारण औद्योगीकरण का विकास है। भारत में श्रम समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण निम्नलिखित मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं:-
श्रम समस्याओं के बढ़ने का मुख्य कारण औद्योगीकरण का विकास है। भारत में श्रम समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण निम्नलिखित मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं:-
श्रम समस्याओं के उत्पन्न होने के कारण निम्नलिखित मुख्य रूप से उत्तरदायी हैं - आर्थिक कारण, मनोवैज्ञानिक कारण, सामाजिक कारण, राजनीतिक कारण
'कृषि श्रमिक' से हमारा आशय गांव में काम करने वाले उन लोगों से है, जो खेती के धंधे में मजदूरी पर काम करते हैं। आबादी का एक बड़ा हिस्सा इन कषि श्रमिकों का है।
बंधुआ मजदूर गरीबी की पराकाष्ठा और शोषण व गुलामी के प्रतीक हैं। आज भी ये बंधुआ मजदूर मौजूद हैं। अब सरकार द्वारा इनके पुनर्वास के प्रयास किए जा रहे हैं।
औद्योगिक स्वास्थ्य या संगठनात्मक स्वास्थ्य बीमारियों को रोकने का एक साधन है। ILO की संयुक्त समिति और जिसने 1950 में आयोजित की थी,
स्वचालन या 'automation' एक नया शब्द है। नई मशीनों के आविष्कार के कारण इसका उपयोग औद्योगिक क्षेत्र में किया जाता है। इस शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम उत्पादन
आधुनिक श्रम विधान के सिद्धांत बहुत से हैं, जिनमें कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों की चर्चा नीचे की गई है। यहां यह उल्लेखनीय है कि इनमें से अधिकांश सिद्धांत एक दूसरे
सामाजिक जीवन में श्रमिकों के महत्व में वृद्धि और उनकी स्थिति में सुधार, श्रमिक संघों के विकास, उनके बारे में जागरूकता के कारण श्रम विधान का प्रसार बढ़ा है।
कार्यक्रमों के आयोजन और सेवाओं के प्रावधान को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकते हैं । कुछ श्रम कल्याण के सिद्धांत इस प्रकार है -
श्रम कल्याण में श्रमिक समुदाय के लिए सामाजिकएवं बौद्धिक कल्याण, मनोरंजन, सुरक्षा और आर्थिक लाभ से सम्बन्धित अनेक प्रकार के कार्य शामिल हैं।
श्रम के बिना उद्योग की कल्पना नहीं की जा सकती। श्रम शारीरिक और मानसिक दोनों होता है। उद्योग में श्रम का अधिक महत्व है और उद्योग के लिए श्रम एक आवश्यक तत्व है।